किसी उपयोगी किताब के बाद कई बातें बदलने का मन हो सकता है। फिर रोज़मर्रा लौट आती है और नोट्स वहीं रह जाते हैं। पढ़े हुए को अपनाने के लिए सबकुछ बदलने की जगह एक विचार को अपने संदर्भ में परखना एक सरल शुरुआत है।

विचार को अपने शब्दों में लिखें

किताब की पंक्ति नकल करने के बाद अपने लिए एक और वाक्य लिखिए: मैं इससे क्या समझा? यदि बात अपनी भाषा में स्पष्ट नहीं हो रही, तो उस हिस्से को दोबारा पढ़ना उपयोगी हो सकता है। लेखक का दावा और अपना निष्कर्ष अलग-अलग रखने की कोशिश करें।

एक ऐसा प्रयोग जो दिखाई दे

‘मैं बेहतर पाठक बनूँगा’ के बदले ‘इस सप्ताह तीन बार चाय के बाद दो पन्ने पढ़ूँगा’ जैसा काम चुनें। यह हमारा उदाहरण है; अपनी दिनचर्या के अनुसार समय और मात्रा बदलें।

प्रयोग इतना छोटा रखें कि असफल होने पर उसे समझ सकें। एक साथ बहुत कुछ बदलेंगे तो पता लगाना कठिन होगा कि किस बदलाव ने मदद की और किसने अतिरिक्त बोझ बढ़ाया।

अपने अनुभव को उत्तर देने दें

सप्ताह के अंत में देखें: क्या किया, कहाँ अटके और आगे क्या बदलेंगे? किसी किताब की अच्छी बात भी हर व्यक्ति की परिस्थिति में समान रूप से काम करे, यह ज़रूरी नहीं।

पढ़ी हुई बात की अगली मंज़िल आपका अपना अनुभव हो सकती है।