किसी काम का परिणाम देर से आए तो जल्दी में अपनी पूरी कोशिश को असफल कह देना आसान है। धैर्य का मतलब आँख बंद करके लगे रहना भी नहीं। कभी वह ठहरकर दिशा देखने और सोच-समझकर दोबारा चलने का नाम होता है। ये हिंदी की सफर के मौलिक विचार हैं।
गति से पहले दिशा
अपनी प्रगति को देखते समय केवल बीता समय न गिनें। यह भी देखें कि आपने क्या समझा और अब किस बात को बेहतर ढंग से कर सकते हैं।
धीमे कदम तब भी यात्रा हैं, जब मंज़िल अभी दिखाई नहीं देती।
कुछ पंक्तियाँ, अपने लिए
- धैर्य हर हाल में रुकना नहीं; सही कारण से टिकना है।
- कल से थोड़ा स्पष्ट होना भी आज की एक उपलब्धि है।
- कभी ठहराव हमें बताता है कि हम कहाँ जाना चाहते हैं।
- जिस रास्ते पर चल रहे हैं, उसे फिर परखना पीछे लौटना नहीं है।
- आराम रास्ते से बाहर की जगह नहीं; कभी वह सफर का आवश्यक हिस्सा है।
- हर प्रयास का उत्तर तुरंत नहीं आता, पर हर अनुभव से सवाल बेहतर हो सकता है।
एक सवाल साथ ले जाएँ
आज आप किस चीज़ के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं? उसमें कौन-सा छोटा हिस्सा आपके नियंत्रण में है? उसी हिस्से के लिए एक हल्का, संभव कदम लिखें। बाकी के बारे में अनिश्चितता होना स्वीकार किया जा सकता है।
इन पंक्तियों को सफलता का वादा मानने के बजाय सोचने का निमंत्रण समझिए। किसी दिन इन्हें पढ़ना अच्छा लगेगा; किसी दिन चुपचाप आराम करना अधिक उपयोगी होगा।


पाठकों की टिप्पणियाँ